ELPS Theory in Maths

ELPS Theory in Maths Teaching से बच्चों का गणित से भय दूर ऐसे करें

प्राथमिक कक्षाओं में अक्सर बच्चे गणित के नाम पर घबराने लगते हैं। डर की इस समस्या के समाधान के लिए ELPS Theory in Maths Teaching एक अचूक Pedagogical टूल साबित होती है। आमतौर पर शिक्षक सीधे ब्लैकबोर्ड पर संख्याएं और कठिन सूत्र लिख देते हैं। यह तरीका बच्चों में गणित का डर (Math Anxiety in Children) पैदा करता है। बच्चे स्कूल आने से पहले अपने घरेलू परिवेश में अनौपचारिक गणित सीखकर आते हैं। वे टॉफियां बांटना और खिलौने गिनना बखूबी जानते हैं। इसे शिक्षाशास्त्र की भाषा में सहज गणित (Intuitive Math) कहा जाता है। शिक्षकों को बच्चों के इसी व्यावहारिक ज्ञान को आधार बनाना चाहिए।

गणित शिक्षण का पारंपरिक तरीका अमूर्त संकेतों से शुरू होता है, जो सर्वथा गलत है। इसके विपरीत, ELPS Theory in Maths Teaching शिक्षकों को एक बहुत ही वैज्ञानिक मार्ग प्रदान करती है। यह सिद्धांत गणित को चार सरल और क्रमिक चरणों में विभाजित करता है। जब हम इस थ्योरी को अपनी दैनिक शिक्षण योजना में शामिल करते हैं, तो गणित रटने की जरूरत नहीं पड़ती। बच्चे खेल-खेल में गणितीय अवधारणाओं को गहराई से आत्मसात करने लगते हैं। यह दृष्टिकोण बच्चों के मन में छिपे गणित के भय को जड़ से समाप्त कर देता है। इसलिए, हर शिक्षक को इस आधुनिक शिक्षण पद्धति को जरूर समझना चाहिए।

2. स्कूली गणित बनाम सहज गणित: डर की शुरुआत कहाँ से होती है?

जब बच्चा घर पर होता है, तो उसका गणित वास्तविक और मजेदार होता है। लेकिन स्कूल आते ही गणित का स्वरूप पूरी तरह बदल जाता है। प्राथमिक कक्षाओं में गणित शिक्षण के दौरान आने वाली मुख्य बाधाओं को इस तरह से समझते हैं :

मूर्त से अमूर्त का त्वरित बदलाव (Concrete to Abstract Gap) अर्थात ELPS Theory in Maths Teaching

बच्चा घर पर टॉफियों और कंचों से गणित सीखता है। यह पूरी तरह मूर्त (Concrete) होता है। स्कूल में हम बहुत जल्दी अमूर्त संकेतों पर आ जाते हैं। बच्चा इन संकेतों को अपने जीवन से जोड़ नहीं पाता है। 

नियमों को रटने पर अत्यधिक जोर

कक्षाओं में अक्सर “क्यों” से ज्यादा “कैसे” पर ध्यान दिया जाता है। हम बच्चों को हासिल वाले जोड़ के नियम रटाते हैं। जब गणित केवल नियमों का खेल बन जाता है, तो बच्चे बोर होने लगते हैं।

सटीकता का मनोवैज्ञानिक दबाव

गणित को अक्सर ‘सही या गलत’ के कड़े चश्मे से देखा जाता है। कक्षा में हमेशा एक ही सही उत्तर का दबाव होता है। इस मानसिक दबाव के कारण बच्चे नए प्रयोग करने से डरने लगते हैं।

3. क्या है ELPS Theory in Maths Teaching? गणित सिखाने का सही क्रम

बच्चों के इस डर को दूर करने के लिए ELPS Theory in Maths Teaching सबसे प्रभावी है। यह सिद्धांत गणित सिखाने के चार क्रमिक चरणों को बताता है:

$$\text{E (Experience)} \longrightarrow \text{L (Language)} \longrightarrow \text{P (Pictures)} \longrightarrow \text{S (Symbols)}$$

शिक्षक साथी इस थ्योरी को विस्तार से एक फाइल में भी देख सकते हैं जिसका नाम “ELPS Theory_ Article.docx” है। आइए इन चारों चरणों को सरल शब्दों में समझते हैं:

E – Experience (मूर्त अनुभव) इसमें ये करें- ELPS Theory in Maths Teaching का पहला चरण

गणित की शुरुआत हमेशा बच्चों के वास्तविक अनुभवों से शुरू करें.

ब्लैकबोर्ड पर संख्या लिखने से पहले उन्हें कंचे, पत्तियां या तीलियां गिनने दें।

उन्हें वस्तुओं को छूकर महसूस करने के मौके दें।

L – Language (घरेलू भाषा) में ध्यान रखें-

शुरुआत में किताबी और औपचारिक भाषा थोपने से बचें।

बच्चों को अपनी मातृभाषा में गणितीय विचारों को व्यक्त करने दें।

‘जोड़’ और ‘घटाव’ की जगह ‘मिलाना’ और ‘कम होना’ जैसे शब्दों का उपयोग करें।

P – Pictures (चित्र) में व्यक्त करें-

जब बच्चे ठोस वस्तुओं और भाषा को समझ जाएं, तब उन्हें चित्रों पर लाएं।

कॉपियों में वस्तुओं के चित्र (जैसे 3 आम के चित्र) बनाकर अवधारणा स्पष्ट करें।

यह दिमाग में एक स्पष्ट छवि बनाता है।

S – Symbols (अमूर्त संकेत) ELPS Theory in Maths Teaching का अंतिम चरण

यह गणित शिक्षण में ELPS Theory in Maths Teaching का सबसे अंतिम चरण होना चाहिए। जब बच्चा ऊपर के तीनों चरणों को पार कर ले, तब उसे संकेत सिखाएं। अब बच्चा $(+, -, \times, \div)$ जैसे संकेतों का वास्तविक मतलब समझ पाएगा।

4. प्राथमिक शिक्षकों के लिए 3 जरूरी सुझाव

यदि आप अपनी कक्षा में ELPS Theory in Maths Teaching लागू कर रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • अनुभवों को प्राथमिकता दें: ब्लैकबोर्ड पर सीधे संख्या लिखने के बजाय हमेशा ठोस वस्तुओं से शुरुआत करें।

  • अनौपचारिक भाषा को सराहें: अगर बच्चा कहता है कि “मेरे कुछ खिलौने खो गए”, तो यह गणितीय अभिव्यक्ति नहीं है। 

  • गलतियों को ‘सीखने की खिड़की’ मानें: यदि बच्चा गिनने में गलती करता है, तो उसे बिल्कुल न डांटें। 

  • गणितीय सोच को समझें: हो सकता है वह एक-एक की संगति (One-to-One Correspondence) का नियम सीख रहा हो। 

  • सीखने का प्रयास: इसका मतलब है कि वह हर एक वस्तु के लिए सही संख्या बोलना सीख रहा है।

  • सकारात्मक दृष्टिकोण: यह गलती बच्चे के सीखने के प्रयास को दर्शाती है, जिसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

5. निष्कर्ष: बच्चे कोरी स्लेट नहीं हैं!

सार बात यह है कि बच्चे गणित से नहीं डरते हैं-

  • बच्चे उस स्कूली गणित से डरते हैं जो उनके जीवन से मेल नहीं खाती. 
  • प्राथमिक शिक्षक के रूप में हमें उनकी सहज सोच को व्यवस्थित और तार्किक बनाना है।
  • बच्चे बुनियादी मानसिक गणित पहले से जानते हैं।
  • हमें बस उनके अनुभवों को सही क्रम में ढालना है।
  • जब हम ELPS Theory in Maths Teaching का नियमित उपयोग करेंगे, तब हर बच्चा ‘नन्हा गणितज्ञ’ बन सकेगा। 

आपकी बारी: क्या आपने अपनी कक्षा में कभी गणित सिखाने का सही क्रम या ELPS थ्योरी का प्रयोग किया है? अपना दिलचस्प अनुभव नीचे कमेंट सेक्शन में हमारे साथ ज़रूर साझा करें! 

ELPS बच्चों के मस्तिष्क में गणितीयकरण को आसान बनाने में मदद करती है. गणितीयकरण क्या है जानने के लिए यहाँ क्लिक करें 

ELPS थ्योरी को इस वीडियो के माध्यम से और अच्छे से समझें

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By Radhe Shyam Thawait

Radhe Shyam Thawait is an educational consultant, teacher educator, and curriculum specialist with more than 30 years of experience in school education. He has worked with universities, SCERT, state education missions, and national educational organisations in curriculum development, teacher professional development, educational leadership, and academic resource creation. As the Founder of RST EDU, he publishes research-based articles, practical classroom strategies, leadership insights, and evidence-informed educational resources for teachers, school leaders, teacher educators, researchers, and education professionals. His work supports the effective implementation of NEP 2020 and the National Curriculum Framework (NCF) while promoting quality teaching and meaningful learning.

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