SOCIAL SCIENCE PEDAGOGY

This category explores social science teaching, critical thinking, democratic values, and inquiry-based pedagogy connected with society and everyday life. It focuses on meaningful learning experiences that help learners understand social, cultural, historical, and civic perspectives.

Children's Research Fair
EDUCATION PERSPECTIVES, LANGUAGE, MATHEMATICS PEDAGOGY, SOCIAL SCIENCE PEDAGOGY

Children’s Research Fair

Children’s Research Fair बाल शोध / बाल शोध मेला (Children’s Research Fair) क्या है? बाल शोध / बाल शोध मेला (Children’s Research Fair) एक ऐसा मंच है, जहाँ बच्चे अपने आस-पास की दुनिया को समझने के लिए अपनी जिज्ञासा और रुचि को व्यक्त कर सकते हैं। बाल शोध / बाल शोध मेला (Children’s Research Fair) […]

Social Science in NCF 2023
EDUCATION PERSPECTIVES, NCF-SCF, SOCIAL SCIENCE PEDAGOGY

Social Science in NCF 2023

कुछ उदाहरणों के साथ Social Science in NCF2023: एक व्यापक समझ Social Science in NCF 2023 स्कूली शिक्षा में सामाजिक विज्ञान की भूमिका को एक नए और व्यापक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है। यह केवल तथ्यों को याद करने का विषय नहीं है, बल्कि यह छात्रों को मानव समाज, उसकी संरचना, और उसके निरंतर बदलते स्वरूप

SOCIAL SCIENCE PEDAGOGY

सामाजिक विज्ञान-उद्देश्य-प्रकृति

सामाजिक विज्ञान की प्रकृति और उद्देश्य को समझना एक शिक्षक के लिए एक जरूरी उपक्रम है, इसी प्रकृति और उद्देश्य के आधार पर सामाजिक विज्ञान के शिक्षण को दिशा मिलती है।   सामाजिक विज्ञान की प्रकृति- सामाजिक विज्ञान की  उद्देश्य और प्रकृति को समझने के लिए हमे समझना होगा की इसका जुडाव सीधे सीधे हमारे गतिशील समाज

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सामाजिक संस्थान

सामाजिक संस्थान की विशेषताओं को समझते हुए इसे पहचानने के लिए कुछ उदाहरणों को समझेंगे। इसके लिए परिवार, विवाह, राजनीति में विद्यमान उन विशेषताओं को समझने का प्रयास करेंगे जिससे उन्हें हम एक सामाजिक संस्थान के रूप में देख सकें।  सामाजिक संस्थान  परिवार एक सामाजिक संस्थान – प्रत्यक्ष नातेदारी संबंधों से जुड़े व्यक्तियों का एक

सामाजिक संस्थान के मायने
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सामाजिक संस्थान के मायने

सामाजिक संस्थान: व्यक्ति, समाज और संस्थागत प्रभाव का समाजशास्त्रीय विश्लेषण व्यक्ति अपने जीवन में अनेक निर्णय लेता है। पहली नज़र में यह लगता है कि वह निर्णय स्वयं ले रहा है, परंतु समाजशास्त्रीय दृष्टि से देखने पर यह स्पष्ट होता है कि उसके निर्णयों के पीछे सामाजिक संस्थानों का प्रभाव होता है। अर्थात, व्यक्ति की

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