Leadership in Multi-Leve Classroom

Leadership in Classroom Managements

यह लेख Leadership in Classroom Managements प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों तथा शिक्षक प्रशिक्षकों एवं शाला अनुवीक्षणकर्त्ताओं के लिए लिखा गया है, जो यह समझना चाहते हैं कि NEP 2020 और NCF-SE 2023 के संदर्भ में प्रभावी क्लासरूम मैनेजमेंट कैसे किया जाए—विशेषकर बड़ी और बहु-स्तरीय कक्षाओं में अर्थात How to manage classroom as per NCF-SE 2023. 

Classroom Managment कक्षा प्रबंधन

कक्षा केवल पढ़ाने की जगह नहीं होती, वह नेतृत्व का पहला और सबसे जीवंत मंच होती है। यहाँ शिक्षक का हर शब्द, हर निर्णय और हर व्यवहार बच्चों के सीखने, सोचने और साथ रहने के तरीके को दिशा देता है। प्रभावी क्लासरूम मैनेजमेंट Leadership in Classroom Management अनुशासन थोपने से नहीं, बल्कि नेतृत्व करने से संभव होता है—ऐसे नेतृत्व से जो विश्वास, संवाद और सहभागिता पर आधारित हो। जब शिक्षक स्वयं को कक्षा का नेतृत्व कर्त्ता मानता है, तब वह बच्चों को नियंत्रित नहीं करता, बल्कि उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करता है। यही दृष्टि कक्षा को एक साधारण स्थान से बदलकर सीखने के समुदाय में बदल देती है।

नेतृत्व को समझने की मेरी यात्रा

2012 में जब मुझे पहली बार शिक्षा के क्षेत्र में Leadership पर कार्य करने का अवसर मिला, तब प्रारम्भ में मैंने अपने वरिष्ठ शिक्षाविदों के साथ सहयोगी के रूप में काम किया। उस समय मेरे मन में यह प्रश्न लगातार चलता रहा कि शिक्षा में नेतृत्व के वास्तविक मायने क्या हैं। यद्यपि इससे पहले मैं शासकीय एवं गैर-शासकीय संस्थाओं में अकादमिक सलाहकार, कार्यक्रम अधिकारी और राज्य विषय समन्वयक जैसी भूमिकाओं में कार्य कर चुका था, फिर भी नेतृत्व को लेकर मेरी समझ सीमित थी।लीडरशिप पर काम की शुरुआत में यह अहसास धीरे-धीरे हुआ कि मैं तब अपने से वरिष्ठों की अपेक्षाओं को केवल “ज़मीन पर उतारने वाला” व्यक्ति था—एक कार्यान्वयनकर्ता, न कि नेतृत्वकर्ता। यहीं से सोच का एक नया मोड़ आया। आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो लगता है कि शिक्षक हो, प्रधान पाठक हो या कोई भी शैक्षिक अधिकारी—हर व्यक्ति को स्वयं को एक लीडर के रूप में देखने और समझने की आवश्यकता है। इस लेख में मैं उसी अनुभव, आत्ममंथन और सीख को साझा करने का प्रयास कर रहा हूँ, ताकि कक्षा और विद्यालय में नेतृत्व को नए दृष्टिकोण से देखा जा सके …

Leadership in classroom management as per NCF-SE 2023 in Indian primary classroom
Leadership in Classroom Management: NCF-SE 2023 के व्यावहारिक संदर्भ
  1. कक्षा प्रबंधन  क्यों हर शिक्षक की पहली ज़रूरत है?

(Leadership in Classroom Managements)

Why Leadership in Classroom Managment? प्रबंधन (Classroom Management) को अक्सर केवल अनुशासन से जोड़कर देखा जाता है, जबकि वास्तव में यह सीखने की पूरी प्रक्रिया की रीढ़ है। एक अच्छी तरह से प्रबंधित कक्षा वह स्थान होती है जहाँ बच्चे सुरक्षित महसूस करते हैं, अपनी बात कहने का साहस करते हैं और सीखने में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। यदि कक्षा का वातावरण तनावपूर्ण, डर-आधारित या अव्यवस्थित हो, तो चाहे पाठ कितना ही अच्छा क्यों न हो, सीखना प्रभावी नहीं हो पाता।

NCF-SE 2023 के संदर्भ में कक्षा प्रबंधन का अर्थ है—ऐसा वातावरण बनाना जहाँ हर बच्चा महत्वपूर्ण है और हर शिक्षक एक सशक्त पेशेवर के रूप में कार्य करता है।

  1. क्लासरूम मैनेजमेंट का बदलता अर्थ – NCF-SE 2023 के संदर्भ में 

मेरे अनुभव में कक्षा में अक्सर ऐसा होता है कि जब शिक्षक अनुशासन को केवल शांति और नियंत्रण के रूप में देखता है, तो बच्चे चुप तो हो जाते हैं, लेकिन सीखने की सक्रियता धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। इसके विपरीत, जब शिक्षक बच्चों को प्रश्न पूछने, अपनी बात रखने और गलती करने की अनुमति देता है, तो कक्षा कभी-कभी शोरगुल वाली जरूर लगती है, लेकिन वही शोर वास्तव में सीखने का संकेत होता है। NCF-SE 2023 इसी बदलाव की बात करता है—जहाँ कक्षा प्रबंधन का अर्थ बच्चों को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का नेतृत्व करना है। मैंने देखा है कि जब शिक्षक समूह कार्य, खुली चर्चा और अनुभव आधारित गतिविधियों को स्थान देता है, तो बच्चे नियमों का पालन डर से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से करते हैं। यही वह बिंदु है जहाँ पारंपरिक अनुशासन की जगह सहभागिता ले लेती है और कक्षा एक जीवंत सीखने का स्थल बन जाती है।

  1. नीति से व्यवहार तक: कक्षा में NCF-SE 2023 कैसे दिखता है/दिखेगी? (Education Policy in Classroom)

NCF-SE 2023 की मूल भावना तभी वास्तविक रूप लेती है जब वह कक्षा की दैनिक प्रक्रियाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई दे। छात्र-केंद्रित कक्षा में शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का सुविधाकर्ता होता है। ऐसी कक्षा में बच्चे प्रश्न पूछते हैं, अपने अनुभव साझा करते हैं और समूह में मिलकर सीखते हैं। संवाद आधारित शिक्षण में शिक्षक एकतरफा निर्देश देने के बजाय खुली बातचीत, सोच को उकसाने वाले प्रश्न और सार्थक चर्चा को स्थान देता है। सहभागिता तब मजबूत होती है जब पाठ्यपुस्तक से आगे बढ़कर गतिविधियाँ, परियोजनाएँ, भूमिका-अभिनय और स्थानीय संदर्भों को सीखने से जोड़ा जाता है। इसी प्रकार आकलन भी केवल परीक्षा तक सीमित न रहकर निरंतर फीडबैक, आत्म-मूल्यांकन और सहपाठी मूल्यांकन का स्वरूप ग्रहण करता है। जब ये सभी तत्व कक्षा में नियमित अभ्यास बन जाते हैं, तब नीति कागज़ से निकलकर कक्षा की संस्कृति बनती है। प्रभावी Leadership in Classroom Management आगे चलकर न केवल कक्षा, बल्कि पूरी शाला की सीखने की संस्कृति को आकार देती है।

  1. सकारात्मक कक्षा वातावरण कैसे बनाएं?

Leadership in Classroom Managements के लिए जरुरी ‘सकारात्मक कक्षा वातावरण’ किसी एक दिन में नहीं बनता, यह रोज़मर्रा के छोटे व्यवहारों से बनता है और इसकी शुरुआत उसी दिन से कर देना चाहिए जिस दिन हम किसी बच्चे या बच्चों के समूह से रूबरू होते हैं. मुझे याद है देश के जानेमाने एक शिक्षाविद से जब मेरी मुलाक़ात एक लम्बे अरसे बाद हुई और मुझे उन्होंने मेरे नाम से संबोधित किया तो मुझे बहुत खुशी हुई थी, जबकि मुझे लगा था कि वे मेरा चेहरा भी भूल चुके होंगे. कक्षा में शिक्षक और बच्चों के मध्य ये बहुत मायने रखता है कि हम बच्चों को उनके नाम से बुलाएं, उनकी बात को ध्यान से सुनें, उनकी प्रयासों की चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो, सराहना करें.  यहाँ एक बात हमेशा याद रखनी होगी कि बच्चों की तुलना अन्य बच्चों के साथ करने के बजाय उनके पिछली कामों से ही करें.  इस प्रकार जब बच्चे यह महसूस करते हैं कि शिक्षक उन्हें समझता है, तो वे नियमों का पालन डर से नहीं, बल्कि सम्मान से करते हैं।

  1. बहु-स्तरीय कक्षा का प्रबंधन: एक वास्तविक चुनौती 

    Leadership in Multi-Leve Classroom

प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में बहु-स्तरीय कक्षा एक सामान्य वास्तविकता है, जहाँ एक ही कक्षा में कुछ बच्चे धाराप्रवाह पढ़ लेते हैं, जबकि कुछ अभी अक्षर पहचानने के स्तर पर होते हैं। ऐसी स्थिति में यदि शिक्षक एक ही तरीके और एक ही गति से पढ़ाने का प्रयास करता है, तो कक्षा प्रबंधन कठिन हो जाता है। इसके विपरीत, समूह आधारित कार्य बच्चों को उनकी क्षमता के अनुसार सीखने का अवसर देते हैं, अपने साथियों से सीखने का मौक़ा देना अर्थात Peer Learning के माध्यम से बच्चे एक-दूसरे से सीखते हैं, और अलग-अलग स्तर की गतिविधियाँ हर बच्चे को सीखने से जोड़ती हैं। इन तरीकों से न केवल कक्षा की विविधता संभाली जा सकती है, बल्कि कक्षा में अनुशासन भी स्वाभाविक रूप से बना रहता है। यहाँ शिक्षक का विवेक सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि वही कक्षा की वास्तविक ज़रूरतों को समझकर उपयुक्त रणनीतियों का चयन करता है।

  1. बड़ी कक्षा में अनुशासन बनाए रखना: डर नहीं, संबंध से

NEP 2020 बार-बार इस बात पर ज़ोर देती है कि शिक्षा का उद्देश्य आज्ञाकारी बच्चे बनाना नहीं, बल्कि आत्मविश्वासी, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है।इसके लिए नीति में Positive Discipline, Child-friendly learning environment, Fear-free classroom जैसे विचारों पर बल देती है. क्योंकि  डर आधारित अनुशासन बच्चों की जिज्ञासा, संवाद और सीखने की इच्छा को कमजोर करता है. प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक कक्षाओं में 40–50 बच्चों वाली कक्षा में अनुशासन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन अनुभव बताता है कि डाँट-डपट लंबे समय तक काम नहीं करती।जब शिक्षक बच्चों के साथ मिलकर कक्षा के नियम बनाता है—जैसे “जब कोई बोल रहा हो तो हम सुनेंगे”—तो बच्चे उन्हें अपना नियम मानते हैं। यह अनुशासन नियंत्रण से नहीं, संबंध से आता है।

  1. सीखने में पीछे रह गए बच्चों को साथ कैसे लाएँ?

इसके लिए हमें दो महत्वपूर्ण आयामों पर विचार करना होगा- पहला- पहचान, धैर्य और सहयोग और दूसरा- वैकल्पिक गतिविधियाँ और अतिरिक्त अवसर. ये तभी संभव है जब हम पाठ्यक्रम पूरा करने के निर्देशित दबाव की जरूरतों को बच्चों की वास्तविक शैक्षिक जरूरतों के सन्दर्भ में देखें. उदाहरण के लिए जो बच्चे अभी पढ़ना नहीं सीख पाए हैं वे कैसे कक्षा स्तर के निर्देशित सवालों पर काम कर सकेंगे. इन परिस्थितियों का सामना बेहतर शिक्षण विज्ञान की समझ के साथ ही किया जा सकता है.

उदाहरण के लिए- कक्षा 4 में पर्यावरण अध्ययन का एक पाठ पढ़ाया जा रहा है, जिसमें कक्षा स्तर  के तहत बच्चों से लिखित प्रश्नों पर काम करने की अपेक्षा है। कक्षा में कुछ बच्चे प्रश्न पढ़कर स्वयं उत्तर लिख लेते हैं, लेकिन 6–7 बच्चे ऐसे हैं जो अभी धाराप्रवाह/समझ के साथ पढ़ नहीं पाते। ऐसे में यदि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने के निर्देशित दबाव में सभी बच्चों से वही लिखित कार्य करवाने पर ज़ोर दे, तो ये बच्चे या तो निष्क्रिय हो जाते हैं या कक्षा में अव्यवस्था बढ़ने लगती है। ऐसे में शिक्षक उनकी पहचान कर धैर्य और सहयोग के साथ उन्हें समूह में रखता है, मौखिक उत्तर, चित्र आधारित गतिविधियाँ या सहपाठी सहायता/सीखना (peer Learning) जैसे वैकल्पिक तरीकों का उपयोग करता है और अतिरिक्त समय देता है। इससे बच्चे सीखने की प्रक्रिया से जुड़े रहते हैं और कक्षा प्रबंधन भी सहज बना रहता है।

  1. कक्षा प्रबंधन में शिक्षक की स्वायत्तता और गरिमा

8.1 शिक्षक एक पेशेवर निर्णयकर्ता के रूप में
NCF-SE 2023 और NEP 2020 दोनों ही इस बात पर स्पष्ट रूप से बल देते हैं कि शिक्षक केवल निर्देशों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि एक पेशेवर निर्णयकर्ता है। शिक्षण की गुणवत्ता तब बेहतर होती है जब शिक्षक पर विश्वास किया जाता है और उसे अपनी कक्षा के संदर्भ में निर्णय लेने की स्वायत्तता मिलती है। कक्षा में पाठ पढ़ाते समय शिक्षक पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर तक सीमित न रहकर कहानी, स्थानीय उदाहरण या समूह चर्चा जैसे तरीकों का चयन कर सकता है। गतिविधियों के दौरान बच्चों की समझ, रुचि और सहभागिता को देखकर वह अपनी योजना में बदलाव भी करता है। इसी तरह लिखित परीक्षा के स्थान पर पोस्टर, मौखिक प्रस्तुति या परियोजना आधारित आकलन चुनना शिक्षक के विवेक का परिचायक है। यह स्वतंत्रता शिक्षक की पेशेवर गरिमा को बनाए रखती है और कक्षा को जीवंत बनाती है, जिससे सीखना बच्चों के लिए अर्थपूर्ण, सहभागी और भयमुक्त बनता है—ठीक उसी भावना के अनुरूप जिसकी परिकल्पना NCF-SE 2023 और NEP 2020 करते हैं।

8.2 महासागर और जीवन” पाठ में शिक्षक की स्वायत्तता
“महासागर और जीवन” जैसे विषय पर कार्य करते समय शिक्षक अपनी स्वायत्तता और विवेक का प्रयोग कई स्तरों पर कर सकता है। वह केवल पाठ पढ़वाने तक सीमित न रहकर प्रश्नों के माध्यम से संवाद की शुरुआत कर सकता है और बच्चों के अनुभवों को सीखने से जोड़ सकता है। विषय की समझ को गहरा करने के लिए समूह कार्य, चित्र बनाना, पोस्टर तैयार करना या विचार साझा करने जैसी गतिविधियाँ चुनना शिक्षक के पेशेवर निर्णय को दर्शाता है। आकलन के स्तर पर भी वह केवल लिखित प्रश्नों पर निर्भर न रहकर मौखिक चर्चा, छोटे प्रस्तुतीकरण या संक्षिप्त अभिव्यक्ति को माध्यम बना सकता है। स्थानीय संदर्भ—जैसे नदी, वर्षा और जलचक्र—को जोड़कर शिक्षक विषय को बच्चों के दैनिक जीवन से जोड़ता है। इस प्रकार शिक्षण विधि, गतिविधियों और आकलन का चयन अपने विवेक से करते हुए शिक्षक न केवल अपनी स्वायत्तता का प्रयोग करता है, बल्कि अपनी पेशेवर गरिमा को भी सशक्त रूप से स्थापित करता है।

  1. असेसमेंट और क्लासरूम मैनेजमेंट का संबंध

असेसमेंट और क्लासरूम मैनेजमेंट (Leadership in Classroom Managements)के बीच गहरा संबंध होता है, जिसे शिक्षक कक्षा में प्रतिदिन अनुभव करता है। जब आकलन केवल परीक्षा तक सीमित न होकर निरंतर होता है, तो बच्चे यह समझने लगते हैं कि उनसे क्या अपेक्षा है और वे सीखने की प्रक्रिया में अधिक जिम्मेदार बनते हैं। समय-समय पर दिया गया स्पष्ट और सकारात्मक फीडबैक बच्चों के व्यवहार को दिशा देता है, क्योंकि उन्हें अपनी प्रगति और सुधार के बिंदु समझ में आते हैं। इसी तरह आत्म-मूल्यांकन के अवसर मिलने पर बच्चे अपने काम और व्यवहार पर स्वयं विचार करते हैं, जिससे अनावश्यक अव्यवस्था और अनुशासन संबंधी समस्याएँ कम होती हैं। इस प्रकार निरंतर आकलन, फीडबैक और आत्म-मूल्यांकन कक्षा प्रबंधन को सहज और प्रभावी बनाने में सहायक होते हैं.

शिक्षक अक्सर पूछते हैं:

  • NCF-SE 2023 के अनुसार कक्षा प्रबंधन कैसे करें? (How to manage classrooms as per NCF-SE 2023?)
  • बड़ी कक्षा में अनुशासन कैसे बनाए रखें? (How to maintain discipline in large classrooms?)
  • बहु-स्तरीय कक्षा को कैसे संभालें? (How to maintain discipline in large classrooms?)
  • सीखने में पीछे रह गए बच्चों को कैसे जोड़ें? (How to engage children who are lagging behind in learning?)

इस लेख में इन सभी प्रश्नों का उत्तर कक्षा-आधारित उदाहरणों और शिक्षण विज्ञान के दृष्टिकोण से दिया गया है।

  1. शिक्षक के लिए व्यावहारिक सुझाव (कक्षा में तुरंत अपनाए जा सकने वाले छोटे लेकिन प्रभावी बदलाव)

यह ध्यान रखें कि नीति को कक्षा की वास्तविक प्रक्रियाओं में उतारने के लिए शिक्षक को बड़े बदलावों की नहीं, बल्कि छोटे, तुरंत अपनाए जा सकने वाले उपायों की आवश्यकता होती है। नीचे ऐसे ही Leadership in Classroom Managements के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए जा रहे हैं, जो कक्षा प्रबंधन को मजबूत करेंगे और NCF-SE 2023 / NEP 2020 की भावना को व्यवहार में लाने में सहायक सिद्ध होंगे-

  • कक्षा की शुरुआत 2–3 मिनट के छोटे संवाद से करें, ताकि बच्चे मानसिक रूप से सीखने के लिए तैयार हो सकें।
  • बच्चों के साथ मिलकर 4–5 सरल कक्षा नियम तय करें और उन्हें दीवार पर प्रदर्शित करें।
  • हर पाठ में कम से कम एक ऐसी गतिविधि रखें जिसमें सभी बच्चे कुछ न कुछ कर सकें—बोलना, लिखना, चित्र बनाना या चर्चा करना।
  • तेज़ और धीमी गति से सीखने वाले बच्चों के लिए एक ही कार्य के दो स्तर तय करें।
  • सीखने में पीछे रह गए बच्चों को तुरंत दंड देने के बजाय कारण समझें और वैकल्पिक अवसर दें।
  • लिखित परीक्षा के साथ-साथ मौखिक उत्तर, समूह प्रस्तुति या गतिविधि आधारित आकलन का प्रयोग करें।
  • सकारात्मक व्यवहार को सार्वजनिक रूप से सराहें और गलती को सीखने का अवसर मानें।
  • पाठ्यपुस्तक के उदाहरणों को स्थानीय संदर्भों और बच्चों के अनुभवों से जोड़ें।
  • कक्षा के अंत में 1 मिनट का आत्म-मूल्यांकन कराएँ—“आज मैंने क्या सीखा?”
  • दिन के अंत में स्वयं से यह प्रश्न पूछें—“आज मेरी कक्षा में सीखने का माहौल कैसा था?”

निष्कर्ष अर्थात एक नया दृष्टिकोण: कक्षा ही नीति की असली प्रयोगशाला है

NEP और NCF को केवल दस्तावेज़ नहीं, बल्कि कक्षा को बदलने की मार्गदर्शिका की तरह पढ़ने की ज़रूरत है। ये नीतियाँ यह नहीं बतातीं कि “क्या पढ़ाना है”, बल्कि यह सिखाती हैं कि कक्षा में सीखने का माहौल कैसे गढ़ा जाए—जहाँ अनुशासन डर से नहीं, सहभागिता से बने; और प्रबंधन नियंत्रण से नहीं, संबंधों से हो।

यदि शिक्षक/शिक्षक प्रशिक्षक/अनुवीक्षणकर्त्ता  NCF को इस नज़र से पढ़े कि हर सिद्धांत कक्षा में किस व्यवहार, किस दिनचर्या और किस संवाद में बदलेगा, तो कक्षा प्रबंधन स्वतः सशक्त हो जाएगा।

 

कक्षा प्रबंधन  (Leadership in Classroom Managements) की समझ गहरी करने हेतु NCF के ये हिस्से विशेष रूप से पढ़ें:

  • Learner-Centred Classroom – बच्चों की आवाज़, विकल्प और सक्रिय भूमिका
  • Role of Teacher (Facilitator) – आदेश देने वाला नहीं, सीख का मार्गदर्शक
  • Classroom Culture & Relationships – सम्मान, विश्वास और भावनात्मक सुरक्षा
  • Assessment for Learning – डरमुक्त, निरंतर और सहयोगी आकलन
  • Inclusivity & Equity – विविधताओं के साथ कक्षा का प्रबंधन
  • Pedagogy & Classroom Processes – रोज़मर्रा की शिक्षण प्रक्रियाएँ

https://ncte.gov.in/website/PDF/NMM/Classroom%20Management.pdf/एक उपयोगी सामग्री

Leadership पर ये भी पढ़ें- Leadership Style

अब आप स्वयं के लिए ये निर्णय ले सकते हैं-

  1. प्रभावी कक्षा प्रबंधन नियंत्रण नहीं, नेतृत्व है।
  2. अनुशासन डर से नहीं, संबंधों से बनता है।
  3. NCF को कक्षा-प्रबंधन के दृष्टिकोण से पढ़ना शिक्षक को सशक्त बनाता है.

 

By rstedu

This is Radhe Shyam Thawait; and working in the field of Education, Teaching and Academic Leadership for the last 35 years and currently working as a resource person in a national-level organization.