परिचय: शालाओं का अनुवीक्षण अक्सर शिक्षकों की उपस्थिति, बच्चों की उपस्थिति, पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता, शौचालय, पानी और अन्य व्यवस्थाओं की जाँच तक सीमित रह जाता है। ये सभी बातें महत्वपूर्ण हैं। फिर भी क्या इनसे यह पता चलता है कि बच्चे वास्तव में क्या और कैसे सीख रहे हैं? सीखने-सिखाने में क्या कठिनाइयां आ रही हैं?
लेख ‘शाला का अकादमिक अनुवीक्षण’ इस सवाल को केंद्र में रखता है। इसका उद्देश्य केवल यह देखना नहीं है कि विद्यालय में क्या हो रहा है, बल्कि यह समझना है कि कक्षा में बच्चों का सीखना किस प्रकार हो रहा है। शिक्षक किस तरह पढ़ा रहे हैं? बच्चे कितने सक्रिय हैं?
बच्चे क्या वे सवाल पूछते हैं? क्या वे अपनी बात कह पाते हैं? क्या वे सीखी हुई बातों को नई परिस्थितियों में लागू कर पाते हैं?
साथ ही इस लेख में हम समझेंगे कि अकादमिक अनुवीक्षण को निरीक्षण से अलग कैसे किया जा सकता है। साथ ही यह भी देखेंगे कि कक्षा में क्या देखें, कैसे देखें और अनुवीक्षण के बाद प्राप्त जानकारी का उपयोग शिक्षक क्षमता-वर्धन और शैक्षिक योजना बनाने में कैसे किया जा सकता है।
अकादमिक अनुवीक्षण क्या है?
अकादमिक अनुवीक्षण ऐसी सहयोगात्मक प्रक्रिया है जिसमें विद्यालय और कक्षा की शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का व्यवस्थित अवलोकन करके बच्चों के सीखने की स्थिति को समझा जाता है तथा उसके आधार पर शिक्षकों और विद्यालय को आवश्यक अकादमिक मार्गदर्शन दिया जाता है।
इसलिए अकादमिक अनुवीक्षण को केवल जाँच या निरीक्षण समझना उचित नहीं होगा। इसका वास्तविक उद्देश्य बच्चों के सीखने में सुधार है।
इसे तीन प्रमुख प्रश्नों के माध्यम से समझ सकते हैं—
- बच्चे क्या सीख रहे हैं?
- बच्चे कैसे सीख रहे हैं?
- उनके सीखने को बेहतर बनाने के लिए आगे क्या किया जाना चाहिए?
वर्तमान में प्रचलित शाला अनुवीक्षण की सीमाएँ
किसी विद्यालय के सामान्य निरीक्षण में प्रायः शुरुआत शिक्षकों की उपस्थिति और अनुपस्थिति से होती है। इसके बाद अनुपस्थित शिक्षक/शिक्षकों के कारण, अवकाश आवेदन, बच्चों की उपस्थिति और अनुपस्थिति जैसे विषय देखे जाते हैं।
इसके साथ अभिभावकों से संपर्क, एसएमसी बैठक और बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश भी दिए जाते हैं।
हालांकि विद्यालय की भौतिक सुविधाओं का निरीक्षण भी महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए—
- शौचालय की स्थिति और स्वच्छता
- पेयजल की उपलब्धता
- पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता
- विद्यालय की अन्य मूलभूत सुविधाएँ
- मध्याह्न भोजन की व्यवस्था
ये सभी विद्यालय संचालन के लिए आवश्यक हैं। भौतिक सुविधाएं बच्चों एवं शिक्षकों के सीखने-सिखाने में अहम योगदान देती हैं. लेकिन क्या इन्हें अकादमिक अनुवीक्षण कहा जा सकता है?
अक्सर बच्चों से कुछ सामान्य प्रश्न पूछे जाते हैं। जैसे—
- कोई पहाड़ा सुनाओ।
- तुम किस जिले में रहते हो?
- राज्य का नाम क्या है?
- मुख्यमंत्री का नाम क्या है?
- पाठ्यपुस्तक का कोई अनुच्छेद पढ़कर सुनाओ।
- ब्लैकबोर्ड पर गणित का सवाल हल करो।
शिक्षक से पाठ्यक्रम की प्रगति भी पूछी जाती है।
यह जानकारी उपयोगी हो सकती है। लेकिन इससे कक्षा में चल रही वास्तविक शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया की पूरी तस्वीर नहीं मिलती।
“अकादमिक अनुवीक्षण का केंद्र बच्चों से प्रश्न पूछना नहीं, बल्कि बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को समझना होना चाहिए। हाँ, सीखने की प्रक्रिया को समझने के लिए बच्चों से कुछ ऐसे सवाल किए जा सकते हैं”
शाला का अकादमिक अनुवीक्षण कैसे करें?
अकादमिक अनुवीक्षण के लिए सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि विद्यालय का उद्देश्य क्या है।
इसलिए अनुवीक्षण से पहले कुछ बुनियादी सवाल स्वयं से पूछना उपयोगी होगा. जैसे-
- विद्यालय किन शैक्षिक उद्देश्यों को पूरा करना चाहता है?
- इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कैसी कक्षा-प्रक्रिया आवश्यक है?
- अलग-अलग विषयों में बच्चों को सीखने के कौन से अवसर मिलने चाहिए?
- बच्चों का सीखना कैसे होता है?
- हम कैसे जानेंगे कि बच्चे सीख रहे हैं?
- कक्षा में होने वाली गतिविधियाँ शैक्षिक उद्देश्यों से कितनी जुड़ी हैं?
इन सवालों के जवाब ही अकादमिक अनुवीक्षण की दिशा तय करते हैं।
पूरी कक्षा का अवलोकन क्यों जरूरी है?
कक्षा अवलोकन केवल पाँच-दस मिनट देखकर पूरा नहीं किया जा सकता। यदि संभव हो तो एक पूरी कक्षा, लगभग 40 मिनट से एक घंटे तक, देखना अधिक उपयोगी होगा।
इससे शिक्षक की पूरी शिक्षण प्रक्रिया, बच्चों की प्रतिक्रिया, प्रश्नोत्तर, गतिविधियाँ और सीखने के अवसर समझने में मदद मिलती है।
भाषा की कक्षा में क्या देखें?
भाषा की कक्षा में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि बच्चे पाठ पढ़ पा रहे हैं या नहीं।
यह देखना अधिक महत्वपूर्ण है कि बच्चे—
- अपने विचार मौखिक और लिखित रूप में व्यक्त कर पा रहे हैं या नहीं।
- कहानी या कविता को अपने शब्दों में बता पा रहे हैं या नहीं
- पाठ के प्रश्नों के उत्तर अपने शब्दों में बना पा रहे हैं या नहीं
- कहानी के पात्रों के स्थान पर स्वयं को रखकर कल्पना कर पा रहे हैं या नहीं
- अधूरी कहानी को आगे बढ़ा पा रहे हैं या नहीं
- भाषा का प्रयोग संदर्भ के अनुसार कर पा रहे हैं या नहीं।
- अपने साथियों की बात सुनकर उस पर प्रतिक्रिया दे पा रहे हैं या नहीं
(और भी अच्छा होगा, यदि अवलोकनकर्ता के पास विषय/विषयवस्तु से संबंधित ‘सीखने के अधिगम (learning outcomes)’ की भी समझ हो.)
उदाहरण: यदि बच्चों को कोई कहानी पढ़ाई जा रही है, तो केवल पात्रों के नाम पूछने के बजाय पूछा जा सकता है—“यदि तुम इस कहानी के पात्र होते तो क्या करते?”
ऐसे प्रश्न बच्चों की समझ, कल्पना और स्वतंत्र अभिव्यक्ति को सामने लाते हैं।
गणित की कक्षा में क्या देखें?
गणित में केवल सही उत्तर प्राप्त करना सीखने का पूरा प्रमाण नहीं है।
अकादमिक अनुवीक्षण में यह देखना चाहिए कि बच्चे—
- गणितीय अवधारणाओं को समझ पा रहे हैं या नहीं.
- आधारभूत संक्रियाओं का स्वतंत्र रूप से प्रयोग कर पा रहे हैं या नहीं.
- इबारती सवालों को समझकर हल कर पा रहे हैं या नहीं.
- किसी समस्या को हल करने के लिए रणनीति बना पा रहे हैं या नहीं.
- अपने उत्तर के पीछे तर्क बता पा रहे हैं या नहीं.
- सीखी हुई अवधारणा को नई परिस्थिति में लागू कर पा रहे हैं या नहीं.
उदाहरण: यदि बच्चों ने क्षेत्रफल पढ़ा है, तो केवल सूत्र पूछने के बजाय पूछा जा सकता है—
“यदि इस कमरे में टाइल्स लगानी हों तो कितनी टाइल्स की आवश्यकता होगी? हम इसका पता कैसे लगाएंगे?”
इस तरह का प्रश्न गणित को वास्तविक जीवन से जोड़ता है।
शिक्षक अवधारणाओं को स्पष्ट करने के लिए स्थानीय सामग्री और अन्य सहायक शिक्षण सामग्री का उपयोग कर रहे हैं या नहीं, यह भी देखना चाहिए।
पर्यावरण अध्ययन, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में क्या देखें?
इन विषयों में बच्चों को केवल तथ्य याद कराने के बजाय उनके आसपास की दुनिया को समझने के अवसर मिलना चाहिए।
पर्यावरण अध्ययन और विज्ञान
अकादमिक अनुवीक्षण के दौरान देखें कि बच्चे—
- अवलोकन कर रहे हैं।
- वस्तुओं का वर्गीकरण कर रहे हैं।
- प्रश्न पूछ रहे हैं।
- परिकल्पना बना रहे हैं।
- प्रयोग कर रहे हैं।
- परिणामों पर चर्चा कर रहे हैं।
- निष्कर्ष निकाल रहे हैं।
- अपने आसपास की समस्याओं की खोज कर रहे हैं।
उदाहरण: पानी के विषय पर बच्चों से केवल “पानी के स्रोतों के नाम” पूछने के बजाय अपने गाँव या मोहल्ले में पानी के स्रोतों का पता लगाने और उनकी स्थिति पर चर्चा करने को कहा जा सकता है।
सामाजिक विज्ञान
सामाजिक विज्ञान में बच्चों को घटनाओं के बीच संबंध और कारण-परिणाम समझने के अवसर मिलने चाहिए।
उदाहरण के लिए—
- धरातलीय संरचना और वर्षा का संबंध।
- वर्षा और फसलों का संबंध।
- फसलों और खानपान का संबंध।
- मौसम और पहनावे का संबंध।
- ऐतिहासिक घटनाओं और वर्तमान परिस्थितियों का संबंध।
नक्शे, ग्लोब, चित्र, स्थानीय संसाधन और अन्य शिक्षण सामग्री का उपयोग भी देखा जा सकता है।
कक्षा में किन सामान्य बातों का अवलोकन करें?
विषय चाहे कोई भी हो, कुछ प्रश्न सभी कक्षाओं में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है—
क्या शिक्षक यह मानते हैं कि सभी बच्चे सीख सकते हैं?
यदि इसका उत्तर व्यवहार में (सकारात्मक) दिखाई देता है, तो कक्षा में सीखने के अवसर भी अधिक समावेशी होने की संभावना रहती है।
अकादमिक अनुवीक्षण में केवल शिक्षक को क्यों न देखें?
बच्चों का सीखना शिक्षक के काम से जुड़ा है। इसलिए बच्चों की उपलब्धि को समझते समय शिक्षण प्रक्रिया को भी समझना जरूरी है। हालांकि बच्चों के उत्तर/प्रत्युत्तर हमें शिक्षक के काम को समझने में मदद करते हैं.
केवल शिक्षक के काम को देखने का अर्थ शिक्षक की कमियाँ ढूँढ़ना नहीं है।
अच्छा अकादमिक अनुवीक्षण यह यह देखता है कि —
“बच्चों के सीखने को बेहतर बनाने के लिए शिक्षक को किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता है?”
इस दृष्टिकोण से अनुवीक्षण निरीक्षण से सहयोग की ओर बढ़ता है।
अकादमिक अनुवीक्षण के बाद क्या करें?
अनुवीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण चरण अनुवीक्षण के बाद शुरू होता है।
यदि किसी कक्षा में बच्चों को लिखित अभिव्यक्ति में कठिनाई दिखाई देती है, तो केवल यह लिख देना कि “बच्चों का प्रदर्शन कमजोर है” पर्याप्त नहीं होगा।
इसके आधार पर आगे की योजना बननी चाहिए।
उदाहरण के लिए—
- शिक्षकों के साथ समस्या पर चर्चा करें।
- संभावित कारणों की पहचान करें।
- शिक्षकों के साथ बैठक/Study Forum में इस विषय को रखें।
- आवश्यक हो तो शिक्षक उन्मुखीकरण आयोजित करें।
- कक्षा में प्रयोग किए जा सकने वाले तरीके साझा करें।
- कुछ समय बाद फिर से कक्षा का अवलोकन करें।
- बच्चों के सीखने में हुए बदलाव को देखें।
यही प्रक्रिया अकादमिक अनुवीक्षण को सतत अकादमिक सहयोग में बदलती है।
संकुल अकादमिक समन्वयक और BEO के लिए इसका उपयोग

संकुल अकादमिक समन्वयक, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी अकादमिक अनुवीक्षण से प्राप्त जानकारी का उपयोग कई स्तरों पर कर सकते हैं।
वे यह पहचान सकते हैं कि—
- शिक्षकों को विषयवार किस प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
- संकुल अकादमिक बैठक का एजेंडा क्या होना चाहिए
- भाषा और गणित में किन अवधारणाओं पर विशेष चर्चा आवश्यक है
- किन कक्षाओं में अतिरिक्त अकादमिक सहयोग चाहिए।
- डाइट या अन्य अकादमिक संस्थाओं से किस प्रकार का सहयोग लिया जा सकता है
- वार्षिक कार्ययोजना में किन अकादमिक मुद्दों को शामिल किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही अनुवीक्षण स्वयं अनुवीक्षक की क्षमता-वर्धन की जरूरत भी सामने ला सकता है।
इसलिए अकादमिक अनुवीक्षण केवल शिक्षक की क्षमता जानने का माध्यम नहीं है। यह अकादमिक नेतृत्व की क्षमता विकसित करने का भी माध्यम है।
NEP 2020 और NCF-SE 2023 के संदर्भ में अकादमिक अनुवीक्षण
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा को केवल जानकारी याद करने तक सीमित रखने के बजाय बच्चों में समझ, कौशल, चिंतन और समग्र विकास पर जोर देती है।
इसी तरह National Curriculum Framework for School Education 2023 में शिक्षण-अधिगम को अधिक अनुभवात्मक, दक्षता-आधारित और बच्चों की सक्रिय भागीदारी से जोड़ने की दिशा दिखाई देती है।
इस संदर्भ में अकादमिक अनुवीक्षण का प्रश्न केवल यह नहीं होना चाहिए कि—
“पाठ्यक्रम कितना पूरा हुआ?”
बल्कि यह भी होना चाहिए—
“पाठ्यक्रम के माध्यम से बच्चे क्या समझ पा रहे हैं और कर पा रहे हैं?”
यही बदलाव निरीक्षण से अकादमिक अनुवीक्षण की ओर जाने का महत्वपूर्ण कदम है।
एक प्रभावी अकादमिक अनुवीक्षण की पहचान
एक अच्छा अकादमिक अनुवीक्षण—
- बच्चों के सीखने को केंद्र में रखता है।
- पूरी कक्षा की प्रक्रिया को समझने का प्रयास करता है।
- शिक्षक को केवल मूल्यांकन का विषय नहीं मानता।
- प्रमाण और अवलोकन पर आधारित होता है।
- समस्या के साथ समाधान की दिशा भी खोजता है।
- शिक्षक को आवश्यक अकादमिक सहयोग देता है।
- प्रशिक्षण और क्षमता-वर्धन की जरूरत पहचानता है।
- आगे की कार्ययोजना बनाने में मदद करता है।
- दोबारा अवलोकन और फॉलो-अप की गुंजाइश रखता है।
निष्कर्ष
शाला का अकादमिक अनुवीक्षण केवल विद्यालय की कमियाँ खोजने या एक प्रोफार्मा भरने की प्रक्रिया नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य यह समझना है कि कक्षा में बच्चे किस तरह सीख रहे हैं और उनके सीखने को बेहतर बनाने के लिए शिक्षक तथा विद्यालय को किस प्रकार के अकादमिक सहयोग की आवश्यकता है।
शिक्षा का व्यापक उद्देश्य ऐसे बच्चों का विकास करना है जो अपने आसपास की दुनिया को समझ सकें, प्रश्न पूछ सकें, तर्क कर सकें और विवेकपूर्ण निर्णय ले सकें। इसलिए अकादमिक अनुवीक्षण में भी हमें केवल यह नहीं देखना चाहिए कि बच्चे कितना याद कर पा रहे हैं।
हमें यह भी देखना होगा कि बच्चे कितना समझ रहे हैं, कितना सोच रहे हैं, कितने प्रश्न पूछ रहे हैं और अपने ज्ञान का उपयोग नई परिस्थितियों में कैसे कर रहे हैं।
यही दृष्टि अकादमिक अनुवीक्षण को सार्थक बनाती है।
FAQs
1. अकादमिक अनुवीक्षण क्या है?
अकादमिक अनुवीक्षण विद्यालय की शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को समझने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है। इसमें कक्षा, शिक्षक और बच्चों की सहभागिता का अवलोकन करके सीखने में सुधार के लिए आवश्यक अकादमिक सहयोग की पहचान की जाती है।
2. अकादमिक अनुवीक्षण और विद्यालय निरीक्षण में क्या अंतर है?
विद्यालय निरीक्षण में प्रशासनिक और भौतिक व्यवस्थाओं पर अधिक ध्यान हो सकता है। अकादमिक अनुवीक्षण का मुख्य केंद्र बच्चों का सीखना और कक्षा की शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया होता है।
3. कक्षा का अकादमिक अनुवीक्षण कितने समय तक करना चाहिए?
संभव हो तो एक पूरी कक्षा का अवलोकन करना चाहिए। सामान्यतः 40 मिनट से एक घंटे का अवलोकन शिक्षण प्रक्रिया को समझने के लिए अधिक उपयोगी हो सकता है।
4. अकादमिक अनुवीक्षण में बच्चों से प्रश्न पूछना चाहिए?
हाँ, लेकिन केवल तथ्य याद होने की जाँच के लिए नहीं। ऐसे प्रश्न अधिक उपयोगी हैं जो बच्चों की समझ, तर्क, अभिव्यक्ति, कल्पना और समस्या-समाधान की क्षमता को सामने लाते हैं।
5. अकादमिक अनुवीक्षण के बाद क्या करना चाहिए?
अनुवीक्षण के बाद शिक्षक के साथ चर्चा, समस्या की पहचान, आवश्यक अकादमिक सहयोग, प्रशिक्षण या उन्मुखीकरण और बाद में फॉलो-अप अवलोकन करना चाहिए।
6. क्या अकादमिक अनुवीक्षण शिक्षक के मूल्यांकन का माध्यम है?
इसका प्राथमिक उद्देश्य शिक्षक को दंडित करना या केवल मूल्यांकन करना नहीं होना चाहिए। इसका उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों के सीखने में सुधार के लिए आवश्यक अकादमिक सहयोग उपलब्ध कराना होना चाहिए।
यदि आप शिक्षक, संकुल अकादमिक समन्वयक, BEO, BRCC या किसी अकादमिक सहयोगी भूमिका में हैं, तो अगली बार विद्यालय का दौरा करते समय केवल यह न पूछें कि “क्या-क्या पूरा हुआ?”
एक पूरी कक्षा में बैठकर यह देखने का प्रयास करें—
“बच्चे आज वास्तव में क्या सीख रहे हैं?”
यही सवाल आपके अकादमिक अनुवीक्षण को एक नई दिशा दे सकता है।

