Last Updated on: Aug 30, 2026
assessment of language learningप्राथमिक कक्षा में समझकर पढ़ने और भाषा सीखने का आकलनभाषा आकलन का उद्देश्य केवल सही उत्तर नहीं, बल्कि बच्चे की समझ का आकलन करना है.

क्या उत्तर बता देना ही सीखना है? भाषा सीखने का आकलन करते समय हम अक्सर एक सरल प्रश्न पूछते हैं—बच्चे ने सही उत्तर दिया या नहीं? लेकिन क्या केवल सही उत्तर मिल जाना यह साबित करता है कि बच्चे ने वास्तव में भाषा को समझा है?

मान लीजिए कि किसी बच्चे ने कहानी पर आधारित प्रश्न का सही उत्तर दिया। पहली नजर में तो लगेगा कि उसने कहानी समझ ली है। लेकिन क्या हम इसके आधार पर पक्के तौर पर ऐसा कह सकते हैं? हो सकता है कि उसने कहानी को समझकर उत्तर दिया हो। यह भी संभव है कि उसने संबंधित पंक्ति याद कर ली हो। उत्तर दोनों ही स्थितियों में सही होगा, लेकिन बच्चे ने वास्तव में क्या सीखा—यह जानने के लिए हमें थोड़ा और आगे देखना पड़ेगा।
यहीं से भाषा के आकलन को देखने का दृष्टिकोण बदल जाता है।
भाषा का प्रभावी आकलन मुख्यतः दो बातों पर ध्यान देता है—
  1. बच्चा क्या समझता है?
  2. वह अपनी समझ को कैसे व्यक्त करता है?
इस लेख में हम देखेंगे कि रटने पर आधारित प्रश्नों से समझ-आधारित प्रश्नों की ओर कैसे बढ़ाया जा सकता है। साथ ही, हम Reading Comprehension, संदर्भगत शब्दावली और Learning Outcomes से जुड़े व्यावहारिक उदाहरण भी देखेंगे।

भाषा सीखने का आकलन: वास्तव में हमें क्या देखना चाहिए?

भाषा केवल शब्दों को याद करने का विषय नहीं है। भाषा सीखते समय बच्चा अर्थ बनाता है। वह घटनाओं को जोड़ता है। पात्रों को समझता है। संदर्भ से अर्थ निकालता है। अपनी राय बनाता है।
इसलिए आकलन करते समय विषय/पाठ के लिए निर्धारित अधिगम प्रतिफल का ध्यान रखना होगा.

भाषा आकलन के दो प्रमुख क्षेत्र

समझकर पढ़ना (Reading Comprehension)बच्चा पढ़ी सामग्री का अर्थ समझता है या नहीं
संदर्भगत भाषाबच्चा संदर्भ के आधार पर शब्द, भावना और अर्थ समझता है या नहीं
NCERT के ‘सीखने के प्रतिफल’ (Learning Outcomes) और PARAKH से जुड़े आकलन दृष्टिकोण की मूल भावना भी समझ और दक्षता पर ध्यान देने की ओर संकेत करती है। इसलिए प्रश्न केवल स्मृति की जांच करने वाले न होकर बच्चे की वास्तविक भाषाई क्षमता को सामने लाने वाले होने चाहिए।
एक विचार करें:यदि प्रश्न का उत्तर पुस्तक की उसी पंक्ति में मिल जाता है, तो क्या वह प्रश्न बच्चे की समझ को पर्याप्त रूप से जांच रहा है?

पारंपरिक प्रश्नों की सीमा कहाँ है?

स्कूलों की परीक्षाओं में बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) और सीधे उत्तर वाले प्रश्न उपयोग में आते हैं। ऐसे प्रश्न उपयोगी हो सकते हैं। समस्या तब पैदा होती है, जब पूरा आकलन केवल उन्हीं पर निर्भर हो जाए।

उदाहरण: एक सामान्य प्रश्न

प्रश्न:
राजू के साथ खेल के मैदान में क्या हुआ?
उत्तर:
(क) उसके दोस्त उसके साथ नहीं खेले।
बच्चा सही उत्तर चुन लेता है। उसे पूरे अंक मिलते हैं। लेकिन अब थोड़ा रुककर सोचिए—
  • क्या बच्चे ने कहानी को समझा?
  • क्या उसने उत्तर पाठ याद करके दिया?
  • क्या वह इसी घटना को अपने शब्दों में समझा सकता है?
  • क्या वह कहानी से कोई निष्कर्ष निकाल सकता है?
यदि बच्चा केवल याददाश्त के आधार पर उत्तर देता है, तो हमें उसकी वास्तविक भाषाई दक्षता की पूरी जानकारी नहीं मिलती।
इसी प्रकार, यदि पाठ्यपुस्तक के अभ्यासों में उत्तर सीधे पाठ की पंक्तियों से मिल जाते हैं, तो बच्चे को स्वतंत्र रूप से सोचने का अवसर कम मिलता है।
इसलिए प्रश्नों में विविधता आवश्यक है।

Learning Outcomes के प्रकाश में भाषा का आकलन

NCERT के सीखने के प्रतिफलों को देखें, तो प्राथमिक स्तर पर भाषा सीखने का मतलब केवल यह नहीं है कि बच्चा किसी कहानी या कविता को पढ़कर उसका उत्तर दे दे। असल बात यह है कि वह उस रचना के बारे में बातचीत कर सके—घटनाओं और पात्रों पर अपनी बात कह सके, सवाल पूछ सके, अपनी राय के पीछे कारण बता सके और अंत में पाठ से कोई निष्कर्ष भी निकाल सके। यानी बच्चे की समझ केवल उसके दिए हुए उत्तर में नहीं, बल्कि उसकी बातचीत और अपनी बात कहने के तरीके में भी दिखाई देती है।
इस प्रतिफल को तीन हिस्सों में समझा जा सकता है:
शिक्षण विधा और कौशलकहानी, कविता, हास्य या साहसिक प्रसंग
विषयवस्तुघटना, चित्र, पात्र, कथानक और शीर्षक
लक्षित भाषाई क्षमताप्रश्न पूछना, तर्क देना, राय व्यक्त करना और निष्कर्ष निकालना
इसका अर्थ स्पष्ट है-
यदि बच्चा पढ़ी हुई सामग्री पर अपनी स्वतंत्र राय दे सकता है, कारण बता सकता है या कोई निष्कर्ष निकाल सकता है, तो हमें उसकी समझ के बारे में अधिक सार्थक जानकारी मिलती है।

समझ-आधारित प्रश्न कैसे बनाएँ?

अब मूल प्रश्न आता है—ऐसे प्रश्न कैसे बनाए जाएँ?
इसके लिए हमें पाठ की किसी पंक्ति को सीधे पूछने के बजाय बच्चे को दो या अधिक सूचनाओं को जोड़ने, संदर्भ समझने या संकेतों से अर्थ निकालने का अवसर देना चाहिए।

उदाहरण: बच्चों में निष्कर्ष निकालने की क्षमता (Inference) की जांच के लिए ये अनुच्छेद देखते हैं-

अनुच्छेद:
“नमस्ते! मैं हेमा हूँ। मुझे अपने परिवार के साथ ऐतिहासिक स्थलों पर घूमना बहुत पसंद है। पिछली गर्मियों की छुट्टियों में मैं हैदराबाद गई और गोलकुंडा किला देखा। इस साल मैं आगरा गई और ताजमहल देखकर बहुत खुश हुई।” (NAS में पूछे गए प्रश्न)
प्रश्न:
गोलकुंडा और आगरा में क्या समानता है?
विकल्प:
  • (अ) दोनों हैदराबाद में स्थित हैं।
  • (आ) दोनों ऐतिहासिक महत्त्व के स्थल हैं।
  • (इ) वे केवल पिकनिक मनाने की जगह हैं।
  • (ई) दोनों उत्तर भारत में हैं।
सही उत्तर: (आ) दोनों ऐतिहासिक महत्त्व के स्थल हैं।

यह प्रश्न बेहतर क्यों है?

अनुच्छेद में यह वाक्य सीधे नहीं लिखा गया है कि गोलकुंडा और ताजमहल ऐतिहासिक स्थल हैं। बच्चे को उपलब्ध जानकारी से संबंध बनाना है।
यदि बच्चा सही उत्तर देता है, तो यह संकेत मिलता है कि उसने—
  1. अनुच्छेद को ध्यान से पढ़ा।
  2. गोलकुंडा और ताजमहल को पहचानो।
  3. दोनों के बीच समानता समझी।
  4. पाठ में सीधे न दी गई जानकारी से निष्कर्ष निकाला।
यही Inference या निष्कर्ष  तक पहुँचने की क्षमता की जांच है।

संदर्भगत शब्दावली: केवल शब्द नहीं, अर्थ समझना

भाषा सीखने का दूसरा महत्त्वपूर्ण पक्ष है—संदर्भ के आधार पर अर्थ समझना।
कई बार कोई शब्द पाठ में मौजूद नहीं होता। फिर भी बच्चा परिस्थिति से उसका अर्थ समझ सकता है। ऐसे अवसर आकलन के लिए बहुत उपयोगी हैं।

उदाहरण 2: संदर्भगत अर्थ समझना

अनुच्छेद:
“राजू उदास होकर घर आया और बोला, ‘मम्मी, मेरे साथ कोई नहीं खेलता।’’ मम्मी ने कहा—‘इसमें उदास होने की बात नहीं है। कल तुम अपने दोस्तों से कहो कि वे तुम्हें खेल में शामिल करें।’ अगले दिन राजू ने ऐसा ही किया और सब बच्चे उसे साथ खिलाने लगे।”
प्रश्न:
राजू की बात सुनने के बाद माँ ने उसे—
  • (क) सजा दी
  • (ख) सलाह दी
  • (ग) डाँटा
  • (घ) उपेक्षा की
सही उत्तर: (ख) सलाह दी।
कृपया ध्यान दें कि अनुच्छेद में ‘सलाह’ शब्द कहीं भी नहीं आया है।
फिर बच्चा सही उत्तर कैसे देता है?
वह माँ की बात और परिस्थिति को समझता है। फिर उस व्यवहार को उचित शब्द से जोड़ता है।
इस प्रकार का प्रश्न यह देखने में मदद करता है कि बच्चा संदर्भ से अर्थ निकाल सकता है या नहीं।

Formative Assessment को कक्षा से जोड़ना

यदि हम केवल अर्धवार्षिक या वार्षिक परीक्षा पर निर्भर रहें, तो बच्चे की सीखने की प्रक्रिया को लगातार समझना कठिन हो सकता है।
इसलिए कक्षा-शिक्षण के दौरान भी आकलन के अवसर बनाए जा सकते हैं।

उदाहरण के लिए शिक्षक पूछ सकते हैं—

  • इस कहानी का शीर्षक आपको कैसा लगा? क्यों?
  • यदि आप कहानी के पात्र होते, तो क्या करते?
  • चित्र देखकर आपको क्या लगता है कि आगे क्या होगा?
  • आपको कौन-सी घटना सबसे महत्त्वपूर्ण लगी?
  • आपने ऐसा निष्कर्ष कैसे निकाला?
इन प्रश्नों का उद्देश्य केवल सही उत्तर प्राप्त करना नहीं है। उद्देश्य बच्चे की सोच और भाषा को सुनना भी है।
यहीं Formative Assessment उपयोगी बनता है।

कक्षा में इसका व्यवहारिक उपयोग कैसे करें?

शिक्षक अपने मौजूदा प्रश्नों में छोटे-छोटे बदलाव से शुरुआत कर सकते हैं।

परंपरागत प्रश्नों के बजाय समझ-आधारित प्रश्न कैसे हों?

कहानी में क्या हुआ?आपको क्यों लगता है कि ऐसा हुआ?
पात्र कहाँ गया?पात्र के जाने का कारण क्या हो सकता है?
कविता का नाम क्या है?शीर्षक कविता के भाव से कैसे जुड़ता है?
शब्द का अर्थ क्या है?इस वाक्य में उस शब्द का क्या अर्थ है?
सही उत्तर चुनिए।अपने उत्तर का कारण बताइए।
इस बदलाव के लिए समझ-आधारित प्रश्नों की संख्या और बढ़ानी होगी।

कुछ इस तरह-

  1. भाषा के प्रश्न केवल स्मृति पर आधारित न हों। उनमें बच्चे की Reading Comprehension भी सामने आई।
  2. किसी पाठ को पढ़ने के बाद बच्चे से यह पूछना उपयोगी होगा कि उसने क्या समझा और उसे ऐसा क्यों लगा।
  3. संदर्भगत शब्दावली के प्रश्नों के माध्यम से यह देखा जा सकता है कि बच्चा परिस्थिति के आधार पर अर्थ समझ पा रहा है या नहीं।
  4. कुछ प्रश्न ऐसे भी हों, जिनमें बच्चे को पाठ से आगे सोचकर कोई निष्कर्ष निकालना पड़े।
  5. जहाँ संभव हो, बच्चे को अपनी राय अपने शब्दों में रखने का अवसर दें।
  6. केवल उत्तर जान लेना पर्याप्त नहीं है। कई बार यह जानना अधिक महत्त्वपूर्ण होता है कि बच्चे ने वह उत्तर क्यों चुना।
  7. तो हमें क्या करना होगा? इसका सीधा सा जवाब है मौखिक चर्चा, चित्र-वर्णन और छोटे संवाद को भी आकलन के तरीकों में शामिल करना. अतः  प्रश्नों का चयन संबंधित Learning Outcomes को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

2026 के शैक्षणिक संदर्भ में आगे की राह

आज आवश्यकता केवल प्रश्नों की संख्या बढ़ाने की नहीं है। आवश्यकता प्रश्नों की गुणवत्ता और उद्देश्य पर विचार करने की है।

शिक्षकों के लिए तीन महत्त्वपूर्ण कदम

पहला—रटने की संस्कृति से आगे बढ़ें।
कक्षा 1 से 8 तक के प्रश्नों में सोचने और अपनी भाषा में उत्तर देने का अवसर होना चाहिए।
दूसरा—Formative Assessment को मजबूत करें।
मौखिक चर्चा, चित्र-वर्णन और खुले-अंत वाले प्रश्नों का उपयोग कक्षा-शिक्षण में किया जा सकता है।
तीसरा—शिक्षक क्षमता का निर्माण करें।
शिक्षकों को ऐसे प्रश्न तैयार करने का अभ्यास चाहिए, जो सीधे पाठ्यपुस्तक की पंक्तियों पर निर्भर न हों और Learning Outcomes से जुड़े हों।

कुछ महत्वपूर्ण सुझाव: एक प्रश्न बनाने से पहले ये चार सवाल पूछें

किसी भी भाषा प्रश्न को अंतिम रूप देने से पहले शिक्षक स्वयं से पूछ सकते हैं—
  1. क्या बच्चा इसका उत्तर केवल याद करके दे सकता है?
  2. क्या उसे उस पाठ को समझना पड़ेगा?
  3. क्या प्रश्न संदर्भ से अर्थ निकालने का अवसर देता है?
  4. क्या उत्तर से बच्चे की सोच या भाषा का कुछ पता चलेगा?
यदि इन प्रश्नों के उत्तर संतोषजनक हैं, तो प्रश्न अधिक सार्थक आकलन की दिशा में जा सकता है।

निष्कर्ष

भाषा सीखने का आकलन तभी सार्थक बनता है, जब वह बच्चे की वास्तविक सीखने की क्षमता सामने लाता है। केवल सही उत्तर मिल जाना पर्याप्त नहीं है। हमें यह भी जानना होगा कि बच्चे ने उत्तर कैसे समझा और वह अपनी समझ को कैसे व्यक्त करता है।
इसलिए भाषा के प्रश्नों में Reading Comprehension, संदर्भगत अर्थ, निष्कर्ष, तर्क और स्वतंत्र अभिव्यक्ति को स्थान देना आवश्यक है।
रटने से समझने की यह यात्रा केवल परीक्षा की संरचना बदलने से पूरी नहीं होगी। इसके लिए कक्षा-शिक्षण, प्रश्न-निर्माण और शिक्षक-क्षमता-निर्माण—तीनों को साथ लेकर चलना होगा।
सही प्रश्न केवल उत्तर नहीं खोजता; वह बच्चे की सोच को भी सामने लाता है।

FAQs

1. भाषा सीखने का आकलन क्या होता है?

भाषा सीखने का आकलन वह प्रक्रिया है, जिसमें यह समझने का प्रयास किया जाता है कि बच्चा भाषा में क्या समझता है और अपनी समझ को कैसे व्यक्त करता है। इसमें केवल याददाश्त नहीं, बल्कि समझ, संदर्भ, निष्कर्ष और अभिव्यक्ति जैसी क्षमताओं पर भी ध्यान दिया जाता है।

2. Reading Comprehension का आकलन क्यों आवश्यक है?

Reading Comprehension से यह समझने में मदद मिलती है कि बच्चा पढ़ी हुई सामग्री का अर्थ समझ रहा है या केवल शब्दों और वाक्यों को याद कर रहा है। इसलिए भाषा के प्रभावी आकलन में समझकर पढ़ने को महत्त्व देना आवश्यक है।

3. Competency-Based Question क्या होता है?

Competency-Based Question ऐसा प्रश्न है, जो केवल जानकारी याद करने के बजाय बच्चे की किसी वास्तविक क्षमता की जांच करता है। उदाहरण के लिए, बच्चे से निष्कर्ष निकालने, संदर्भ समझने, तर्क देने या स्वतंत्र राय व्यक्त करने को कहा जा सकता है।

4. संदर्भगत शब्दावली क्या है?

संदर्भगत शब्दावली का अर्थ है किसी शब्द या भावना का अर्थ उसके प्रयोग और परिस्थितियों के आधार पर समझना। इसमें शब्द को केवल परिभाषा से नहीं, बल्कि पूरे संदर्भ में समझा जाता है।

5. Formative Assessment भाषा शिक्षण में कैसे उपयोगी है?

Formative Assessment के माध्यम से शिक्षक सीखने की प्रक्रिया के दौरान बच्चों की समझ को जान सकते हैं। मौखिक चर्चा, चित्र-वर्णन और खुले-अंत वाले प्रश्न इसके उपयोगी तरीके हो सकते हैं।

6. क्या MCQ प्रश्न हमेशा अनुपयोगी होते हैं?

नहीं। MCQ स्वयं समस्या नहीं है। समस्या तब होती है, जब प्रश्न केवल पाठ की याददाश्त की जांच करते हैं। अच्छी तरह बनाए गए MCQ भी समझ, निष्कर्ष और संदर्भगत अर्थ की जांच कर सकते हैं।
क्या आपकी कक्षा में पूछे जाने वाले भाषा-प्रश्न बच्चों की याददाश्त का परीक्षण करते हैं या उनकी समझ का?
अगली बार प्रश्नपत्र बनाते समय केवल यह न पूछें कि “बच्चे को क्या याद है?”। यह भी पूछें—“बच्चा क्या समझ सकता है, क्या निष्कर्ष निकाल सकता है और अपनी बात कैसे व्यक्त कर सकता है?”
यदि यह लेख आपको उपयोगी लगा हो, तो इसे अपने सहकर्मी शिक्षकों और शिक्षक-प्रशिक्षकों के साथ साझा करें। भाषा आकलन में छोटे बदलाव भी बच्चों के सीखने को देखने का हमारा दृष्टिकोण बदल सकते हैं।
सन्दर्भ – 
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By Radhe Shyam Thawait

Radhe Shyam Thawait is an educational consultant, teacher educator, and curriculum specialist with over 30 years of experience in school education. As the Founder of RST EDU, he publishes research-based educational resources, practical classroom strategies, and leadership insights to support teachers, school leaders, teacher educators, and education professionals while promoting the effective implementation of NEP 2020 and NCF 2023.

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