Assessment of Language Skills

Assessment of Language Skills: रटने या समझने का आकलन?

भाषाई कौशलों के आकलन (Assessment of Language Skills) में प्रश्नों की संरचना अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। शिक्षा विभाग समय-समय पर बच्चों का मासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक आकलन करता है।

इस लेख में एक राज्य स्तरीय अकादमिक

संस्था द्वारा कक्षा 5 के बच्चों के लिए तैयार भाषा आकलन प्रपत्र का संक्षिप्त विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। उद्देश्य यह समझना है कि ऐसे प्रश्न वास्तव में बच्चों की कौन-सी भाषाई क्षमताओं की जांच करते हैं।

प्रश्नों की प्रकृति पर विचार

Assessment of Language Skills: रटने या समझने का आकलन?

मान लीजिए कि किसी प्रश्नपत्र में दिए गए तीनों प्रश्नों के सही उत्तर बच्चे ने लिख दिए। उसे तीन में से तीन अंक मिल गए। इससे हम यह मान सकते हैं कि बच्चा सफल रहा।

लेकिन क्या इससे यह भी सिद्ध होता है कि बच्चे में अपेक्षित भाषाई कौशल विकसित हो गया है? क्या इसे Assessment of Language Skills के रूप में देखेंगे?

इस प्रश्न पर विचार करने के

लिए कुछ बिंदु महत्वपूर्ण हैं।

विश्लेषण के लिए पाँच प्रश्न

  1. क्या ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों से लिए गए हैं?
  2. क्या इनके उत्तर पाठ के किसी अनुच्छेद से सीधे देखे जा सकते हैं?
  3. क्या शिक्षक ने अध्यापन के दौरान इनके उत्तर ब्लैकबोर्ड पर लिखवाए थे?
  4. क्या बच्चे ने पाठ पढ़कर स्वयं उत्तर खोजे थे?
  5. क्या ऐसे प्रश्न राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (NAS) जैसे आकलनों में पूछे जा सकते हैं?

यदि पहले तीन प्रश्नों का उत्तर ‘हाँ’ हो

यदि पहले तीनों प्रश्नों का उत्तर ‘हाँ’ है, तो यह कहना कठिन होगा कि इन प्रश्नों से किसी भाषाई कौशल की जांच हो रही है।

ऐसी स्थिति में बच्चा उत्तर रटकर भी लिख सकता है।

यहाँ रटने (Rote Learning) और स्मरण (Memory) के बीच अंतर समझना आवश्यक है। दोनों एक जैसी प्रक्रियाएँ नहीं हैं। इस विषय पर अलग से चर्चा की जा सकती है।

समेकित आकलन में इन प्रश्नों की उपयोगिता विशेष कर Assessment of Language Skills के रूप में?

मान लेते हैं कि चौथे प्रश्न का उत्तर ‘हाँ’ है।

तब इतना कहा जा सकता है कि बच्चा पाठ पढ़कर उत्तर खोज सकता है।

फिर भी इसे पूर्ण भाषाई कौशल नहीं माना जा सकता। कई बार बच्चा केवल किसी शब्द या वाक्यांश को खोजकर उत्तर लिख देता है।

हाँ, इससे यह संकेत अवश्य मिलता है कि वह अपेक्षाकृत धाराप्रवाह पढ़ सकता है।

अर्धवार्षिक परीक्षा जैसे समेकित या योगात्मक आकलनों में परीक्षक के सामने केवल उत्तर होता है। सीखने की प्रक्रिया दिखाई नहीं देती।

इसलिए यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बच्चे ने उत्तर अपनी समझ के आधार पर खोजा था।

रचनात्मक आकलन में स्थिति

रचनात्मक (Formative) आकलन का उद्देश्य सीखने की प्रक्रिया को समझना है।

फिर भी यदि प्रश्न केवल पाठ से उत्तर खोजने वाले हों, तो वे भाषाई कौशलों का पर्याप्त आकलन नहीं कर पाते।

राष्ट्रीय स्तर के आकलनों में  (Assessment of Language Skills) ऐसे प्रश्न क्यों नहीं पूछे जाते?

पाँचवें प्रश्न का उत्तर लगभग निश्चित रूप से ‘नहीं’ होगा।

राष्ट्रीय स्तर पर प्रश्न बनाने वाले विशेषज्ञों को सभी राज्यों की पाठ्यपुस्तकों की जानकारी नहीं होती। उन्हें यह भी ज्ञात नहीं होता कि भाषा शिक्षण के लिए कौन-सी कहानी या कविता पढ़ाई जा रही है।

यदि सभी राज्यों में एक ही पाठ्यपुस्तक हो, तो यह तर्क लागू नहीं होगा।

फिर भी ऐसे प्रश्नों से भाषाई कौशलों का आकलन करना कठिन है।

राष्ट्रीय सर्वेक्षणों का उद्देश्य व्यक्तिगत प्रतिपुष्टि देना नहीं होता। उनका उद्देश्य शिक्षा की समग्र स्थिति का आकलन करना होता है।

इसे Assessment of Learning कहा जाता है।

इसके विपरीत, विद्यालय स्तर के आकलन बच्चों की सीखने संबंधी कठिनाइयों की पहचान करते हैं। इसे Assessment for Learning कहा जाता है।

एक तीसरा प्रकार Assessment as Learning भी है।

इन तीनों प्रकारों पर विस्तार से किसी अन्य लेख में चर्चा की जाएगी।

क्या अर्धवार्षिक परीक्षा के ये प्रश्न उपयुक्त हैं?

अर्धवार्षिक परीक्षा में पूछे गए ऐसे प्रश्न बच्चों की भाषाई क्षमताओं की जांच के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

इनसे मुख्य रूप से रटने की क्षमता का पता चलता है।

इसलिए ऐसे प्रश्नों को आवधिक या समेकित आकलन का मुख्य आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।

हाँ, अध्यापन के दौरान इनका उपयोग किया जा सकता है। इससे यह पता चल सकता है कि बच्चा पाठ को ध्यानपूर्वक पढ़ रहा है या नहीं।

समझते हुए पढ़ने का आकलन कैसे करें?

अब प्रश्न यह है कि समेकित आकलन के दौरान कैसे पता लगाया जाए कि बच्चा वास्तव में समझकर पढ़ रहा है।

इसके लिए पहले यह समझना होगा कि ‘समझते हुए पढ़ने’ में कौन-कौन से भाषाई कौशल शामिल हैं।

इनकी पहचान के लिए हम सीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes) का सहारा ले सकते हैं।

Learning Outcomes के आधार पर भाषाई कौशलों का आकलन

Assessment of Language Skills: रटने या समझने का आकलन

उपरोक्त सीखने के प्रतिफल को ध्यान से देखने पर तीन महत्वपूर्ण हिस्से दिखाई देते हैं।

1. भाषा की विधा

जैसे – कहानी, कविता, संवाद या अन्य पाठ्य सामग्री।

2. ध्यान देने योग्य तत्व

जैसे – विषयवस्तु, घटनाएँ, चित्र, पात्र, शीर्षक और प्रसंग।

3. विकसित किए जाने वाले भाषाई कौशल

जैसे –

  • शीर्षक पर चर्चा करना
  • प्रश्न पूछना
  • स्वतंत्र टिप्पणी देना
  • अपने विचारों के पक्ष में तर्क देना
  • निष्कर्ष निकालना

यही वे कौशल हैं जिनका विकास भाषा शिक्षण का वास्तविक उद्देश्य है।

अगले लेख में

अगले लेख में हम यह समझने का प्रयास करेंगे कि सीखने के प्रतिफलों के आधार पर प्रश्नों की संरचना कैसी होनी चाहिए।

हम उदाहरणों के माध्यम से देखेंगे कि रचनात्मक और योगात्मक दोनों प्रकार के आकलनों में बच्चों की ‘समझते हुए पढ़ने’ की क्षमता का मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है।

निष्कर्ष

भाषा शिक्षण का उद्देश्य केवल बच्चों से पाठ के उत्तर याद करवाना नहीं है। इसका वास्तविक लक्ष्य उन्हें समझना, प्रश्न पूछना, विचार व्यक्त करना, तर्क देना और निष्कर्ष निकालना सिखाना है। इसलिए भाषाई कौशलों के आकलन के लिए ऐसे प्रश्नों की आवश्यकता है जो बच्चों की समझ, विश्लेषण और अभिव्यक्ति की क्षमता को सामने ला सकें। यदि आकलन केवल पाठ से उत्तर खोजने या रटे हुए उत्तर लिखने तक सीमित रह जाएगा, तो हम बच्चों की वास्तविक भाषाई प्रगति को नहीं पहचान पाएंगे। अतः आवश्यक है कि रचनात्मक और योगात्मक दोनों प्रकार के आकलनों में प्रश्नों की संरचना सीखने के प्रतिफलों पर आधारित हो। तभी आकलन बच्चों के सीखने को दिशा देने वाला प्रभावी उपकरण बन सकेगा, न कि केवल अंक देने की प्रक्रिया।

NEP 2020 and Assessment नई शिक्षा नीति 2020 में आकलन के बारे में और पढ़ें

बेहतर सीखने की तैयारी के रूप में आकलन – पाठशाला भीतर और बहार, अंक – मार्च 2025, अंक 23   पृष्ठ 5 


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By rstedu

Radhe Shyam Thawait is an education specialist, consultant, Freelancer and trainer with 35+ years of experience in teaching, policy, and academic leadership. He is also a content creator and shares practical insights for educators through RSTedu.in.