तीजन बाई के बाद क्या है Future of Folk Art? और NEP 2020 के प्रयास
छत्तीसगढ़ की माटी से उठकर पेरिस और लंदन के मंचों तक गूंजने वाली पंडवानी (Pandwani) की महान आवाज, पद्म विभूषण तीजन बाई का तंबूरा 5 जुलाई 2026 मौन हो गया. उनके जाने से न केवल एक महान कलाकार हमारे बीच से चला गया, बल्कि हमारी वाचिक परंपरा (Oral Tradition) का एक समृद्ध अध्याय भी थम सा गया है। लेकिन इस दुख के बीच एक बड़ा और यक्ष प्रश्न हमारे सामने खड़ा है—क्या डिजिटल मनोरंजन और सोशल मीडिया की इस चकाचौंध में हमारी लोक स्मृतियां भी हमेशा के लिए मौन हो जाएंगी? भारत की सांस्कृतिक पहचान और वैश्विक पटल पर Future of Folk Art (लोक कला का भविष्य) अब किस दिशा में जा रहा है?
क्या हम आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़कर रख पाएंगे, या ये कलाएं सिर्फ संग्रहालयों की शोभा बनकर रह जाएंगी? आइए, इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर सबसे पहले वर्तमान चुनौतियों को समझने का प्रयास करते हैं.
लोक कलाओं का संकट और वर्तमान चुनौतियां
आज का युग तेजी से बदलते बाजारवाद और त्वरित उपभोग (Instant Consumption) का युग है। ऐसे समय में लोक कलाओं के सामने अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है।
प्रमुख चुनौतियां:
मंच का सिकुड़ना: सोशल मीडिया रील्स के सामने घंटों चलने वाली विधाओं के लिए लिए दर्शकों का धैर्य कम होना।
आर्थिक असुरक्षा: लोक कलाकारों के लिए सम्मानजनक आजीविका का साधन न होना।
लिखित धरोहर की कमी: कई लोक विधाएं केवल मौखिक रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ट्रांसफर होती हैं। इससे इनके लुप्त होने का खतरा सबसे ज्यादा है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और कला का भविष्य Future of Folk Art
भारत में Future of Folk Art को सुरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) कला-एकीकृत शिक्षा (Art-Integrated Education) की वकालत करती है। यह नीति शिक्षा में मुख्य विषयों और कला के बीच के कठोर विभाजन को समाप्त कर लोक कलाओं को मुख्य पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाती है, जिससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हो सके।
Future of Folk Art के लिए शिक्षण व्यवस्था में प्रमुख बदलाव
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF 2023) के आने के बाद स्कूली शिक्षा में लोक कलाओं को लेकर दृष्टिकोण पूरी तरह बदल गया है. जैसे :
कला या संगीत को एक्स्ट्रा-करिकुलर (पाठ्येतर) के बजाय इन्हें मुख्य विषयों के रूप में क्रेडिट और मूल्यांकन का हिस्सा बनाना।
एनईपी 2020 अब स्कूलों में स्थानीय शिल्पकारों, गायकों और कलाकारों को ‘अतिथि शिक्षक’ के रूप में मान्यता देती है. ताकि बच्चे सीधे उनके अनुभवों से सीख सकें।
कला-एकीकृत शिक्षा (Art-Integrated Education): उदाहरण और उपयोग
शिक्षा में लोक कलाओं का समावेश केवल कला की कक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीखने का माध्यम (Pedagogical Tool) बन चुका है। कुछ संभावनाएं जहां विषयों में कला को एकीकृत किया जा सकता है:

शैक्षणिक ढांचा, लोक संस्कृति एवं पाठ्यचर्या

सरकार के प्रयास
भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार लोक कलाओं के संरक्षण के लिए लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही हैं।
‘चिन्हारी पोर्टल’ जैसे डिजिटल डेटाबेस के माध्यम से राज्य के लोक कलाकारों को पंजीकृत किया जा रहा है।
‘मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना’ द्वारा जरूरतमंद पारंपरिक कलाकारों को सीधी वित्तीय सहायता दी जा रही है।
‘राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव’ जैसे बड़े आयोजन हमारी लोक संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान कर रहे हैं।
आगे की राह:
डिजिटल आर्काइव बनाना:
प्रत्येक राज्य को अपनी दुर्लभ लोक धुनों, गाथाओं और कला रूपों का हाई-क्वालिटी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना चाहिए।
स्कॉलरशिप और फेलोशिप:
युवा पीढ़ी को लोक कलाओं में रिसर्च और प्रशिक्षण के लिए विशेष फेलोशिप दी जानी चाहिए।
टूरिज्म से जुड़ाव:
होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन (Rural Tourism) को लोक कलाकारों के प्रदर्शनों से जोड़ा जाए ताकि उन्हें नियमित रोजगार मिल सके।
5. निष्कर्ष: Future of Folk Art हमारी सामूहिक जिम्मेदारी
तीजन बाई का मौन तंबूरा याद दिलाता है कि कलाकार नश्वर हैं, लेकिन उनकी कला हमेशा अमर रहनी चाहिए।
लोक कलाओं का भविष्य Future of Folk Art केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि समाज और स्कूलों से सुधरेगा।
जब तक हम बच्चों को लोक कथाएं और स्थानीय उत्सवों से नहीं जोड़ेंगे, तब तक संस्कृति सुरक्षित नहीं रहेगी।
आइए, हम सब मिलकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों को थामें और इस अनमोल लोक धरोहर को हमेशा जीवित रखें।
बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. शिक्षा में कला-एकीकृत शिक्षा (Art-Integrated Education) क्या है?
Ans: यह एक ऐसी शिक्षण पद्धति है जिसमें कला के विभिन्न रूपों (जैसे नृत्य, संगीत, चित्रकला) का उपयोग करके अन्य अकादमिक विषयों (जैसे गणित, विज्ञान, भाषा) को सिखाया जाता है।
Q2. NEP 2020 लोक कलाओं के संरक्षण Future of Folk Art में कैसे मदद करती है?
Ans: NEP 2020 पारंपरिक कलाओं को मुख्य पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाती है, व्यावसायिक अलगाव को खत्म करती है और स्थानीय कलाकारों को स्कूलों से सीधे जोड़ती है।
Q3. तीजन बाई की लोक कला में क्या योगदान है?
Ans: पद्म विभूषण तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की लोक गायन शैली ‘पंडवानी’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और महिलाओं के लिए इस क्षेत्र में नए रास्ते खोले।
Q4. क्या लोक कलाओं से आजीविका कमाना संभव है?
Ans: हाँ, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं, सांस्कृतिक पर्यटन और अकादमिक प्रशिक्षण के माध्यम से अब लोक कलाओं में करियर के नए रास्ते खुल रहे हैं।
Q5. एक आम नागरिक के रूप में हम लोक कलाओं की मदद कैसे कर सकते हैं?
Ans: स्थानीय कलाकारों के शो देखकर, उनके द्वारा बनाए हस्तशिल्प खरीदकर और सोशल मीडिया पर उनकी कला को बढ़ावा देकर हम अपना योगदान दे सकते हैं।
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