Teachers’ Problem-Solving Key

Teachers’ Problem-Solving Key: गणित सीखने का नया नजरिया 

Teachers’ Problem-Solving Key गणित सिखाने और सीखने का एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। हाल ही में अपनी संस्था की एक क्षमतावर्धन कार्यशाला में मुझे इसे व्यवहार में देखने का अवसर मिला। यह अनुभव मेरे लिए अत्यंत रोचक रहा।

प्रारम्भिक शिक्षा के बाद मैं कभी गणित का नियमित विद्यार्थी नहीं रहा। फिर भी, गणित के प्रति मेरे भीतर हमेशा एक विशेष जिज्ञासा बनी रही। शायद यही कारण था कि कार्यशाला के दौरान हर नई अवधारणा मुझे बच्चों के साथ बिताए पुराने अनुभवों की याद दिलाती रही।

जब भी बच्चे किसी इबारती सवाल में उलझते थे, तब हम उनके साथ मिलकर समस्या को समझने का प्रयास करते थे। कई बार समाधान तक पहुँचने से अधिक महत्वपूर्ण वह प्रक्रिया होती थी, जिसके माध्यम से बच्चा सोचता है।

Teachers’ Problem-Solving Key भी इसी विचार को महत्व देता है। यह दृष्टिकोण बताता है कि शिक्षक केवल उत्तर बताने वाले व्यक्ति नहीं हैं। शिक्षक स्वयं समस्या-समाधान की प्रक्रिया में शामिल होकर बच्चों के सीखने को बेहतर दिशा दे सकते हैं। इसी प्रक्रिया से बच्चे गणित को अधिक सहज और अर्थपूर्ण रूप में समझ पाते हैं।

George Pólya a Hungarian-American mathematician

बुनियादी साक्षरता एवं इबारती सवाल

बुनियादी साक्षरता और इबारती सवालों का संबंध बहुत गहरा है। प्राथमिक कक्षाओं में बच्चे स्वाभाविक रूप से गणित में रुचि लेते हैं। फिर भी, इबारती सवाल आते ही कई बच्चे उलझ जाते हैं। अक्सर हम मान लेते हैं कि बच्चा पढ़ नहीं पा रहा है। इसलिए हम इसे केवल Foundational Literacy की समस्या समझ लेते हैं।

लेकिन अनुभव इससे आगे की बात बताता है। कई बच्चे सवाल सही ढंग से पढ़ लेते हैं। फिर भी वे पूछते हैं, “सर, इसमें जोड़ना है या घटाना?” यह प्रश्न केवल पढ़ने की कठिनाई नहीं दिखाता। यह समस्या को समझने की चुनौती भी सामने लाता है। साथ ही, यह समाधान चुनने की कठिनाई को भी दर्शाता है।

यहीं पर जॉर्ज पोल्या का दृष्टिकोण उपयोगी सिद्ध होता है। पोल्या ने समस्या समाधान के चार महत्वपूर्ण चरण बताए हैं। ये चरण बच्चों को सोचने और तर्क करने में सहायता करते हैं। साथ ही, वे समाधान तक पहुँचने की प्रक्रिया भी सिखाते हैं।

गणित शिक्षा केवल संख्याओं और सूत्रों तक सीमित नहीं है। यह बच्चों में विचार और निर्णय की क्षमता विकसित करती है। जब बच्चे समस्या हल करते हैं, तब वे केवल उत्तर नहीं खोजते। वे सोचने की एक व्यवस्थित पद्धति भी सीखते हैं।

यदि हम प्राथमिक स्तर पर गणित को सरल बनाना चाहते हैं, तो पोल्या के चरण उपयोगी हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, हम दो सुझावात्मक चरण भी जोड़ सकते हैं। इस प्रकार कुल छह चरण अधिगम को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

 चित्र में कुल 6 चरणों को उद्देश्य के साथ नीचे दिया गया है-

Ganit me samsya samadhan ke 6 charan

 

1. सवाल को ध्यान से पढ़ना और समझना

SCERT छत्तीसगढ़ द्वारा प्रकाशित कक्षा 4 की गणित पुस्तक से एक उदाहरण लेते हैं।

उदाहरण:
पहला पेड़, तीसरे पेड़ से 45 मीटर 50 सेंटीमीटर की दूरी पर है। दूसरा पेड़, तीसरे पेड़ से 25 मीटर 20 सेंटीमीटर की दूरी पर है। बताओ पहले व दूसरे पेड़ के बीच में कितनी दूरी है?

सबसे पहले प्रश्न को बार-बार पढ़ा जाता है। अलग-अलग बच्चों को पढ़ने का अवसर दिया जाता है। इसका उद्देश्य प्रश्न का अर्थ और संदर्भ समझना है।

2. सवाल को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटना

इस चरण में समझा जाता है कि क्या दिया गया है, क्या पूछा गया है और क्या करना है।

  • क्या दिया गया है —
    पहला पेड़ से तीसरे पेड़ की दूरी।
    दूसरा पेड़ से तीसरे पेड़ की दूरी।
  • क्या पूछा गया है —
    पहले और दूसरे पेड़ के बीच की दूरी।
  • क्या करना है —
    जोड़ना है या घटाना है।

इस दौरान महत्वपूर्ण हिस्सों को underline भी किया जाता है।

3. समस्या को चित्र के रूप में समझना

तीसरे चरण में समस्या को चित्र के रूप में दिखाना  इसका उद्देश्य समस्या को दृश्य रूप में समझना है।

4. समस्या को गणितीय रूप देना

इस चरण में शब्दों को संख्याओं और प्रतीकों में बदला जाता है। इससे बच्चे समस्या को गणितीय रूप में समझ पाते हैं।

5. उत्तर निकालना और जाँच करना

इस चरण में सही गणना की जाती है। इसके बाद उत्तर का सत्यापन किया जाता है।

अतः: पहले एवं दूसरे पेड़ की दूरी 20 मीटर 30 सेंटीमीटर है।

6. उत्तर को पूरा वाक्य बनाकर लिखना

इस चरण में उत्तर को अर्थपूर्ण वाक्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इससे बच्चे अपने उत्तर को स्पष्ट रूप में व्यक्त करना सीखते हैं।

बच्चों के साथ सीख को साझा करना

इस प्रक्रिया के बाद बच्चों के साथ सीखी गई बातों पर चर्चा की जा सकती है।

  • पहले सवाल को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
  • फिर सही तरीका चुनना चाहिए।
  • उसके बाद सवाल हल करना चाहिए।
  • अंत में उत्तर की जाँच करनी चाहिए।

यही जॉर्ज पोल्या की चार सीढ़ियाँ हैं। ये हमें समस्या हल करने का सही तरीका सिखाती हैं।

निष्कर्ष

  • पोल्या की चार-चरणीय पद्धति बच्चों को व्यवस्थित ढंग से सोचने की आदत सिखाती है।
  • यह पद्धति केवल गणितीय समस्याओं को हल करना नहीं सिखाती।
  • यह जीवन की कठिनाइयों से जूझने का व्यावहारिक तरीका भी सिखाती है।
  • इस प्रक्रिया से बच्चे समस्या को समझने सीखते हैं।
  • बच्चे समाधान की योजना बनाने को भी सीखते हैं।
  • वे योजना को सही ढंग से लागू करना सीखते हैं।
  • साथ ही, वे अपने उत्तर की जाँच करना भी सीखते हैं।
  • प्राथमिक स्तर से यह अभ्यास बच्चों के लिए बहुत उपयोगी होता है।
  • इससे बच्चे आत्मनिर्भर और तार्किक बनते हैं।
  • वे आत्मविश्वास के साथ समस्याओं का समाधान करना सीखते हैं।
  • इस प्रक्रिया से बच्चों में समस्या-समाधान की आदत विकसित होती है।
  • यही गणित शिक्षण का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य भी है।

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By Radhe Shyam Thawait

Radhe Shyam Thawait is an educational consultant, teacher educator, and curriculum specialist with more than 30 years of experience in school education. He has worked with universities, SCERT, state education missions, and national educational organisations in curriculum development, teacher professional development, educational leadership, and academic resource creation. As the Founder of RST EDU, he publishes research-based articles, practical classroom strategies, leadership insights, and evidence-informed educational resources for teachers, school leaders, teacher educators, researchers, and education professionals. His work supports the effective implementation of NEP 2020 and the National Curriculum Framework (NCF) while promoting quality teaching and meaningful learning.